जामताड़ा
जामताड़ा के नाला प्रखंड परिसर में आयोजित पारंपरिक वाद्य यंत्र वितरण समारोह में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि सभ्यता की अनमोल धरोहर है. इसमें प्रकृति के साथ सामंजस्य, लोक-आस्था और जीवन मूल्यों की गहरी जड़ें समाहित हैं. कल्याण विभाग के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति एवं कला केंद्रों (धुमकुड़िया भवनों) को सशक्त बनाना है. कार्यक्रम का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, उपायुक्त आलोक कुमार, पुलिस अधीक्षक शम्भू कुमार सिंह और परियोजना निदेशक आईटीडीए जुगनू मिंज द्वारा किया गया.
मुख्य अतिथि रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार आदिवासी परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार का निर्णय है कि सभी धुमकुड़िया भवनों में पारंपरिक वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए जाएं, ताकि यह परंपरा अपनी प्रामाणिकता के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके. उपायुक्त आलोक कुमार ने इस पहल को सांस्कृतिक सेतु बताते हुए कहा कि वाद्य यंत्रों का वितरण नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में सहायक होगा और स्थानीय कला को बढ़ावा देगा. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भविष्य में जिले के अन्य प्रखंडों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर धुमकुड़िया भवनों को सुसज्जित किया जाएगा.
पुलिस अधीक्षक शम्भू कुमार सिंह ने आदिवासी कलाओं के संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया. परियोजना निदेशक जुगनू मिंज ने बताया कि नाला प्रखंड की 23 पंचायतों के लिए वाद्य यंत्रों के सेट उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें तुम्दाक, टामाक, हारमोनियम और कोरताल शामिल हैं. इस आयोजन से जामताड़ा के स्थानीय कलाकारों और आदिवासी समुदाय में उत्साह का संचार हुआ है. यह पहल दर्शाती है कि आधुनिकता के बीच सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना ही सच्ची प्रगति है और इससे झारखंड की लोक कला को नई ऊर्जा मिलेगी.